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किसान की उन्नती राज्य की प्रगति

Start Date: 06-10-2018
अंतिम तिथि: 01-12-2018

भारत संरचनात्मक दृष्टि से गांवों का देश है जहां प्रमुख रूप से कृषि ...

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किसान की उन्नती राज्य की प्रगति

भारत संरचनात्मक दृष्टि से गांवों का देश है जहां प्रमुख रूप से कृषि कार्य किया जाता है। इसलिए भारत को कृषि प्रधान देश की संबा प्राप्त है। देश के लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या कृषि एवं संबंधित कार्यों से अपना जीविकोपार्जन करती है। देश एवं प्रदेश की आर्थिक उन्नती में किसानों का महत्वपूर्ण योगदान है। हमारे किसान देश एवं प्रदेश की रीढ़ की हड्डी हैं। यह हमारे किसानों की मेहनत एवं समर्पण का ही परिणाम है कि आज हमारा देश विभिन्न कृषि उत्पादों में न केवल अत्मनिर्भर एवं आत्मसंपन्न है बल्कि निर्यातक भी है। यह भी सर्वविदित है कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। वर्तमान में छ.ग. राज्य न केवल धान उत्पादन में अग्रणी है वरन अन्य फसलों जैसे विभिन्न दलहनी-तिलहनी फसलों वाणिज्यिक फसलों, सब्जी एवं फल उत्पादन के क्षेत्र में भी निरंतर बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

छ.ग. राज्य को नई ऊँचाईयों तक पहुंचाने वाले मेहनत किसानों के आर्थिक एवं समाजिक उत्थान के लिए प्रदेश की सरकार हमेशा से ही प्रयासरत रही है। प्रदेश के किसानों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य दिलाने तथा किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में भी राज्य सरकार कार्यरत है। राज्य सरकार की मंशानुरूप प्रदेश में कृषि एवं कृषकों के भविष्य को बेहतर बनाने तथा उनके आर्थिक एवं समाजिक उत्थान के लिए अपने बहुमूल्य सुझाव/विचार Chhattisgarh.mygov.in पर साझा करें।

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CHHANNU LAL SAHU 3 years 1 month पहले

मेरे राय में जैसा आपेक्षित था किसानो का विकास होगा, खुशहाल किसान खुशहाल छत्तीसगढ़ का सपना पूरा होगा पर ऐसा न हो सका ऐसा क्यों ? सरकार के पास न्यू राजधानी न्यू विधानसभा न्यू विधायक हाउस के लिए पैसे है पर किसानो के लिए पैसे नही है तो कैसा विकास ?

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Ritesh Kumar Rathore 3 years 1 month पहले

Bharat ek krishi prdahaan desh hai.. yaha 70%people only krishi par aashrrit hai. Jo hamare life ka important part hai. Hum khana ke bina nahi ji sakte hai iske liye rice chahiye Jo only krishi work se how mil sakti hai aur kisaan hi is Karya ko Kar sakta hai. Sarkaar ko unke prati sensitivity hona chahiye Jo hamare bhagya nirmata hai issue kisaan bhi khush honge aur rajya ki desh ki unnati bhi hogi Jai Jawan Jai kisaan

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Amoliram Jamdare 3 years 1 month पहले

हमारे देश में किसान अन्नदाता कहलाता है। किसानों की उन्नति पर ही व्यक्ति, समाज, राज्य व देश की उन्नति निर्भर करती है। अतः किसान की उन्नति वास्तव में राज्य की प्रगति का आधार है।

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Surya Prakash 3 years 1 month पहले

छत्तीसगढ़ के लोग कृषि कार्य पर निर्भर है और यह के लोगो का आय का मुख्य स्रोत कृषि है जिसमे केवल वह धान ही मुख्य फसल है | यह के कृषि कार्य हेतु ज्यादातर लोग आज भी धान फसल के लिए वर्षा पर आश्रित है मैंने देखा सही समय पर वर्षा न होने के कारण इस वर्ष धान की फसल अक्षी स्थिति में नही है

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pitambar sahu 3 years 1 month पहले

छत्तीसगढ़ के अधिकांश लोग कृषि कार्य पर निर्भर है और यह के लोगो का आय का मुख्य स्रोत कृषि है किन्तु आज यह के किसानो की जमीन सरकार द्वारा जबरन अधिकृत किया जा रहा है और प्राइवेट कंपनी को दे रहे है जो लोग कृषि पर निर्भर रहे थे ओ आज उन कंपनी के हाथो में गुलाम बन कर काम कर रहे है सरकार द्वारा कृषि की उन्नति के लिए शिक्षा व्यावसायिक को प्राथमिक से ले कर करना चाहिए और रोजगार सृजन हेतु वह किसान की उन्नति चाहता है तो कृषि जमीन को भवन रोड या अन्य निर्माण कार्य को रोकने के लिए नियम बनना चाहिए

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pitambar sahu 3 years 1 month पहले

छत्तीसगढ़ के अधिकांश लोग कृषि कार्य पर निर्भर है और यह के लोगो का आय का मुख्य स्रोत कृषि है यह के कृषि कार्य हेतु लोग आज भी कृषि के लिए वर्षा पर आधारित है कुछ ही जगह बांध या एनीकेट के द्वारा सीचाय के व्यवस्था है किन्तु आज शहरी एरिया के लोगो को सरकार द्वारा जबरन अधिकृत किया जा रहा है और उसमे रोड भवन आदि का निर्माण किया जा रहा है जिसके कारन कृषि एरिया में भारी कटौती हो रहा है जिसके कारन लोगो के पास अपने जीवकोपार्जन के लिए अनाज भंडारण करने में असमर्ध है वही मशीनी करन के कारन बेरोजगार बड रहा है

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ViSHWAS kumar tiwari 3 years 1 month पहले

छत्तीस गढ प्रदेशधान का कटोरा है,जहा पर विभिन्न किश्मो का धान विश्वविख्यात रहा है।
आदिवासी समुदाय खेती पर निर्भर है।हमारे प्रदेश के खुशहाली मे कृषि का अमूल्य योगदान है।सबसे ज्यादा रोजगार सृजन करने वाला क्षेत्र भी है किन्तु मशीनी करण के कारण लोगो का रुचि खेती से हट रहा है ।जो प्रदेश के लिए उपयुक्त नही है ।
हमारे प्रदेश की शिक्षा प्रणाली मे सुधार कर प्रकृति केन्दित विकास के साथ साथ प्राणी जगत को विनास से बचाने के लिए एवं भारत को विश्व गुरु बनाने कार्य करने की आवश्यकता है।

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Ravishankar jaiswal 3 years 1 month पहले

जब उद्योगपति अपने समान कीमत खुद तय करते तो किसान अपने उत्पाद की कीमत खुद तय क्यू नहीं कर सकते। जब किसान अपने अनुसार कीमत तय करेंगे तब जाके कही उनकी स्तिथि सुधार पाएगी।